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छोटा पत्थर

Rahul Shrivastava

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अधूरे काम
        
                                                    
                            
निपटाता हूं

फिर नक़्श और
बनाता हूं...

कुछ को फाड़ता हूं... :(

कुछ को
पूरा कर...

सीने में ठंडक पाता हूं

चलो, चुप रहने का तो
हुनर मिला मुझे 

शोर करता सन्नाटा!
एक-दो खट के बाद से...

अतीत की तस्वीर
पल भर को चमक जाती है

वो सुहानी हो कर भी
कम-सी अच्छी है 

हर कहानी...
एक ही मूल बात कहती है

कि पशेमानी...
मेरे प्रयास से मिटनी है, बननी है

चलो राहुल,
बाद में लिखना...

पहले इस कागजी काम से फ़ुर्सत होओ!

उस समस्या का भी
हल निकल आएगा...

कुछ ना कुछ सोच ही तो रहे हो रोज़ तुम


.
1 सप्ताह पहले
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