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मुझको मार दो

Rabindra Aman

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपने हुस्न के जलवे से ,
        
                                                    
                            
दिल में खंजर उतार दो
अगर तुम मुझको मारना चाहे तो ,
मैं तैयार हूं मुझको मार दो

अगर मैं मर जाऊं तेरे प्यार में ऐ हसीं
मर कर मुझको मिल जाएगी नयी जिंदगी

कहां आता है रोज ऐसा हसीन मौका
मुझसे मेरा दिल चुराकर ,कोई कर गया हसीन धोखा

जब से उसको देखा है, चैन कहीं ना पाऊं
फंसा हूं किस मझधार में, जाने कब उबर पाऊं

अगर होती रहे रोज इस उल्फ़त से मुलाकात
फिर तो बन जाए, अपनी हर बात

मुझको मारने वाला गजब है मेरा कातिल
जिस रूप के सागर मे हम डूबना चाहते थे
वो छोड़ गया हमको साहिल

मर गए हम किसी के प्यार में,
ऐ मौत तू कितनी हसीं है
पर इतनी देर लगादी, जल्दी आती क्यों नही है
-रविन्द्र अमन
एक महीने पहले
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