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हमने लिख दिया इतिहास

Rabindra Aman

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            परवाह नहीं कि भूख की,तड़पती रही मेरी प्यास
        
                                                    
                            
धीरे धीरे हमने लिख दिया इतिहास

मेरे चारो ओर थे मजबूरी लाचारी के हालात
ना किसी का सहारा था, ना था किसी का साथ

एक दीन पिता का मै तो था औलाद
पर मेरे हौसले बुलंद थे, मेरा दिल था फ़ौलाद

मेरा बचपन फूल बनकर कभी ना खिला
समय के साथ जो मिलता है,
शायद मुझको नही मिला

हर गए थे मेरे नैन ,आसूं बहा बहाकर
पर हर हाल में मैने सीखा जीना मुस्कुराकर

मैं उस गली , उस कुचे से आया हूं निकलकर
जहां अच्छे अच्छे के हौसले हो जाते है राख जलकर

आज मुझको नई पहचान मिली है
मुझको मिला है मेरा नाम
ऊपर वाले की दुआ से मुझे मिल गया मुकाम

आज भी मेरा दिल रोता है, आंखों में आता है पानी
पर यह है मेरे धैर्य, मेरी हिम्मत, मेरी खुशी की निशानी

एक युग को समेटे हुए है, मेरे दुःख_ सुख के ये एहसास
धीरे-धीरे हमने लिख दिया इतिहास
-रविन्द्र अमन
 
2 महीने पहले
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