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तमन्ना ए दर्द ए दिल

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आकर तमन्नाओं के बहकावे में हुए नाकाम बार बार जिंदगी से चल कर कांटों की राह पे दर्द और हम बढ़ाने लगे
        
                                                    
                            
गमों की वारिस ने तो दर्द कुछ और बढ़ा दिया खो कर तुम्हें बार बार होकर मायूस चिराग़ ए दिल हम बुझाने लगे
रस्म ए वफा के नाम पर निभाया मैने फर्ज बड़ी शिद्दत से करके याद तुमको बार बार दिल को हम समझाने लगे
सब कुछ तो बदल गया वक्त के साथ साथ मगर इक याद तेरी है जिंदा अभी भी ये सोच कर हम मुस्कराने लगे
है ये भी यकीं हमें तू बेवफा हो सकता नहीं कभी और परख के फितरत तेरी सोच के अंजाम दर्द हम बढ़ाने लगे
एक महीने पहले
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