विज्ञापन

तमन्ना ए दर्द ए दिल

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लाकर तमन्नाओं के बाजार में सौ बार समझाया गया मिटा कर अरमां सारे मेरे राह ए तलब दर्द और बढ़ाया गया
        
                                                    
                            
मुझ पर अहसान जताने वाले मिजाज़ तेरा समझ ना पाया मैं कभी देकर ठोकरें बार बार दिल और जलाया गया
जिधर देखूं उधर मिले कांटे हमें राह में सफर ए जिंदगी भी ना रहा आसान कह के ऐसा दिल को और सताया गया
बढ़ा कर फासला तुमसे हुआ भला कब मेरा राह ए वफा देकर ठोकरें हजार बार चिराग़ दिल का मेरा बुझाया गया
गम की बारिशों ने भी किया इक अहसान मुझ पर बढ़ा कर बार बार दर्द करके मजबूर आशियाना मेरा जलाया गया
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

13403 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

11075 कविताएं

View Profile

Şhahnawaz Pahat

39 कविताएं

View Profile

RATAN KUMAR

854 कविताएं

View Profile

Dr fouzia

6944 कविताएं

View Profile