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फसाना ए मजबूर दिल

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            करूं अब क्या हमें घुट घुट कर जीना पड़ेगा मिटा कर ख्वाहिशें सारी सफर में तुमसे फासला रखना पड़ेगा
        
                                                    
                            
थी ये तमन्ना मर्ज तुमसे और कहना ना पड़े सितम ये मिटा कर ख्वाहिशें सारी हुआ जो दर्द कहना पड़ेगा
पूछते नहीं तुम हाल मेरा तो हुआ क्या हमें भी मिला के खुद को खाक में कोशिश सारी अब भूलना पड़ेगा
सिवा तेरे मेरा कोई अपना ना रहा इस जहां में हमें बना कर इक बहाना अंदाज जीने का भी ढूंढना पड़ेगा
तुम्हें भी मेरे करम पे शक क्यूं वरना मेरा कसूर क्या बताया नहीं कभी इरादा अब क्या तेरा जानना पड़ेगा
1 सप्ताह पहले
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