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फसाना ए दर्द ओ तमन्ना

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जला कर दिया आस का दिल में खुशियां अपनी समेटने लगे तू जब ना मिला तो राह ए वफा तो हम बिखरने लगे
        
                                                    
                            
अंजाम ए वफा जो भी सहना पड़ा हमें मेरी खुशी तुमने अपना जाना कहां सोच कर यादों के दरिया में डूबने लगे
तुमने बढ़ा कर ख्वाहिशें बेशुमार किया जुल्म ओ सितम मुझ पे बहुत होकर मायूस जिंदगी से अब हम डरने लगे
देकर दर्द हजार कर लो मिजाज़ खानदानी देख के मगरुर तुम्हें होकर मायूस जिंदगी से कांटों पर हम चलने लगे
रहा जोर वफाओं का कमजोर हमेशा ये समझ लिया मैंने बदल कर इरादा कोशिशें सारी नाकाम हम करने लगे

 
1 सप्ताह पहले
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