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फसाना ए बेकरार दिल

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            समझ कर खुद को ही इक सौदागर ईमान का दर दर भटकने मैं लगा हूं जान के फैसला आवाम का घबराने लगा हूं
        
                                                    
                            
सच ये सौदा ईमान का है मुश्किल खरीददार मिलते जल्दी कहां देख के सन्नाटा राह ए ईमान घबरा कर डरने लगा हूं
कद्र ईमान की वो क्या जाने जो खुद ही नीयत से बेईमान जान के नीयत जमाने की होकर मायूस अब डरने लगा हूं
कर लो मनमानियां मर्जी के मुताबिक खिलाफ कर ना पाऊंगा करके कोशिश तमाम फासला तुमसे बढ़ाने लगा हूं
होकर मायूस तेरी अदावत से चिराग़ ए दिल अब मैं बुझाने लगा हूं समझ कर तुम्हें अब गैर आदत मैं बदलने लगा हूं
2 सप्ताह पहले
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