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फसाना ए बेचैन जिंदगी

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अकेले रहने की सजा हमने क्यूं कुबूल की है तुझ पे ही ऐतबार ना करने की ये कौन सी भूल की है
        
                                                    
                            
ख्याल आया कि रस्ता बदल लेंगे हम कभी करीब तेरे जाने की जिद में हमने ज़िन्दगी फिजूल की है
ना जाने कौन सा लम्हा करार का होगा तेरे लिए अपना तुम्हें समझने में हमने इक भूल जरूर की है
हमें ख्याल था तू वापस लौट आएगा कभी दिल किस किताब में ना जाने क्यूं तस्वीर तेरी कुबूल की है
दर खुला रख कर इंतजार किया तेरा कांपते लफ्ज़ कह रहे हैं तुम्हें समझने में मैंने अक्सर भूल की है
ये किन नज़रों से तूने मुझे कैद किया समझने में भूल हुई दिल तड़प के कह रहा बेशक इक भूल हुई है
2 सप्ताह पहले
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