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फसाना ए बेचैन तमन्ना

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उम्मीद मेरी कहीं और बट नहीं सकती हमने सीखा है अंधेरों में जीना सोच मेरी कहीं और ठहर नहीं सकती
        
                                                    
                            
देख के लाचारी मेरी मुंह मोड़ लिया तुमने करो लाख जुल्म मुझ पर मगर ये सोच मेरी कभी बदल नहीं सकती
तू कब हुआ मेरा ये तो बता सितम मोहब्बत में हो सकती जरूर मगर हद से ज्यादा जुल्म भी ठहर नहीं सकती
दर्द मेरा और बढ़ाने वाले मिला है कुछ क्या तुम्हें करके कोशिशें नाकाम तमन्ना मेरी भी कभी बिखर नही सकती
अब और न दर्द बढ़ा तू मेरा कुछ तो रहम कर हालांकि अरमान मेरा पास गया तेरे मगर सच्चाई मर नहीं सकती
2 दिन पहले
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