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फसाना ए बेचैन ख्वाहिशें

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मिल के तुमसे इस बार किस्मत अपनी आजमाने लगे हैं लाकर ख्याल ओ ख्वाब में तुम्हें बात दिल की समझाने लगे हैं
        
                                                    
                            
ना रही जिंदगी मेरी आसान कहूं ये सच अपना तुम्हें कैसे सोच के गुज़रा ज़माना तेरा चिराग ए दिल हम बुझाने लगे है
हम बदनसीबों को मिला कब चैन सकूं परख कर नाज़ ओ अदा आपका बेचैन दिल की सिफारिश आपसे करने लगे हैं
जाओ चिराग मत छेड़ो तुम तराना ए गम आकर यादों के मंजर में बदल कर इरादा अंजाम ए वफा हम सोचने लगे हैं
करके मनमानियां अपनी अंजाम सोचा कहां तुने बुझा के दिया आस का बेचैन दिल को ही हम बेशुमार सताने लगे हैं
2 महीने पहले
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