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फसाना ए अर्ज ए तमन्ना

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गमों की बारिश में भीगना चाहता हूं इतना खुशनसीब नहीं जो दर्द कह सकूं मिल कर तुमसे कुछ कहना चाहता हूं
        
                                                    
                            
है आंधियों का काम उड़ा कर ख्वाब सारे कहीं और पटक देना बुझा के चिराग़ दिल ए दर्द अपना कहना चाहता हूं
सच तो ये है मेरी नाकामियों ने किया हमें बर्बाद हमेशा चल कर साथ दो कदम तेरे अब कुछ अर्ज करना चाहता हूं
देख कर आज़ सामने तुम्हें दर्द कहना पड़ा हमें मिल कर तुमसे जुदा ना हो पाएंगे ये सच सामने कहना चाहता हूं
तुम क्या सोच कर फासला बढ़ाने लगे करके सामना बेचैनियों से बुझा के चिराग़ ए दिल मैं कुछ कहना चाहता हूं

 
1 सप्ताह पहले
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