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बुरा वक्त जब आता है तो अपने हो जाते हैं पराए तुम मिटा कर अरमां सारे खिलाफ फैसला सुना जाते हो

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आकर मेरी तन्हाई में कभी बुझा कर दिया आस का दर्द अपनी मर्जी के मुताबिक कुछ और बढ़ा जाते हो
        
                                                    
                            
मैं कोई पत्थर नहीं इंसान हूं समझा नहीं तूने कभी शायद जान के महरूमी करके मायूस दर्द बढ़ा जाते हो
मिटा कर अरमां सोचा नहीं तुमने जाऊंगा मैं कहां तुम तो करके वादे हजार अक्सर नींद मेरा चुरा जाते हो
कभी तो तमन्ना दिल में रख कर आरजू में सोचा करो हमें जान कर तू पराया चिराग़ ए दिल बुझा जाते हो
बुरा वक्त जब आता है तो अपने हो जाते हैं पराए तुम मिटा कर अरमां सारे खिलाफ फैसला सुना जाते हो

 
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