विज्ञापन

फसाना ए अहसास ए वफा

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            देख कर अपनी गर्दिश ए हालात हमें तो रोना जरूरी है खुशी मिले या ना मिले कहना जरूरी है
        
                                                    
                            
इस जहां में खुशी भी हर किसी को कहां नसीब हमें अब बैठ कर घर के कोने में रोना जरूरी हैं
कहना तो था बहुत मगर कह न सका तुमसे हाल कैसा भी हो इस शहर में तेरा भी होना जरूरी है
ओढ़ लेते खुद को ही यादों की चादर से वक्त ए रुखसत अब तो अहसास का बिछौना जरूरी है
खुशहाल मैं हो सकता नहीं पता है तुम्हें फिलहाल हमें यादों के कारवां के साथ जाना भी जरूरी है
5 दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7573 कविताएं

View Profile