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अहसास ए बेचैन तमन्ना

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सुना कर तुम्हें दास्तां ए बेचैन दिल गुज़ार दी रात मैने इस बार होकर मायूस अपने नसीब से बरसात काट दी
        
                                                    
                            
है दर्द बहुत अपनी जिंदगी सुनाऊं फसाना ए दिल कैसे और आपने तो देकर हिदायतें बार बार बात काट दी
मुसीबत में काम आया जब कोई और दिल परेशान कितना जान कर महरूमी मेरी आपने मुलाकात काट दी
है दिल नादान कितना समझ ना पाया मैं ही खुद को हुआ ना मयस्सर चिराग तो बदल के करवटें रात काट दी
होकर मजबूर गिला तुमसे मैं कर ना पाऊंगा बढ़ा कर फासला हमसे होकर मगरुर तूने इक मुलाकात काट दी

 
एक महीने पहले
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