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दास्तां ए बर्बाद दिल

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            है कितना अजीब तमाशा सितमगरों का इरादा ए जफा नहीं जाता उन्हें कत्ल करना किसका ये कहा नहीं जाता
        
                                                    
                            
ये कम है जो बैठा मेरे करीब वो बैठा ही रहेगा पास जब तक मिटा कर ख्वाब सारे मेरे दिल को सता नही जाता
है शहर अंजान हमें फर्क नही तुम्हे शहर का रस्म ओ रिवाज नहीं पता शायद तुम्हें भी अर्ज ए अदा नहीं आता
मैं तमाशा जो देख रहा हूं हैं जो मेरे बहुत अजीज सितम क्यूं उन पर खुदा कसम मुझे हादसा देखा नहीं जाता
मिटा कर अरमां खाक हुए कितने पी कर जहर का घूंट पाया मुकाम बर्बादी का जहां हर कोई देखा नहीं जाता
3 महीने पहले
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