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दर्द ओ बेचैन तमन्ना

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जो गुज़र गया जमाना वापस लौट कर नहीं आयेगा कभी ये तालाब दरिया किसी रोज यूं ही सूख जाएंगे
        
                                                    
                            
हालांकि इससे पहले सफर किया है हमने कई बार मगर इस बार लगा शायद अब तुमको यूं ही भूल जायेंगे
तू भी न हो सका मेरा ये हमें बता गम किसे सुनाएं तुम चलो अपनी राह हम होकर दूर यूं ही दर्द भूल जायेंगे
कोई तो होगा इस ज़माने में हम उससे दिल अपना लगा कर तेरी मर्जी के मुताबिक तुमको यूं ही भूल जायेंगे
हुए नाकाम जब से हम घर अपना छोड़ के आए हैं चल कर कांटों की राह दूर होकर दर्द यूं ही भूल जायेंगे
5 दिन पहले
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