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बेचैन दर्द ओ तमन्ना

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपनी तन्हाइयों से घबराने मैं लगा हूं करके याद तुम्हें सिमटती यादों से बढ़ा के अरमां दिल के याद करने लगा हूं
        
                                                    
                            
छोड़ के गर्दिश ए हालात में गर खुश हो तो ये मर्जी तेरी बिछड़ कर तुमसे ही यादों के कारवां में भटकने मैं लगा हूं
होगा अंजाम ए वफा बुरा सोचा कहां मैने बुझा कर अरमां दिल का होकर मायूस फैसला भी अब बदलने मैं लगा हूं
मिटा के हस्ती मेरी तुम दिल से खुश हो ना पाओगे करके जीना अपना हराम होकर मायूस अकेला चलने मैं लगा हूं
है अब इक दुआ मेरी ना करो मुझ पर रहम ओ करम कोई कुछ तो करो लिहाज़ मेरा मंजिल अब बदलने मैं लगा हूं
एक महीने पहले
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