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अंजाम ए दर्द ए वफा

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            करके याद भूली बिसरी बातें चिराग ए दिल हमें बुझाना पड़ा है ना रहे हम ही अब किसी काम के ये सोचना पड़ा है
        
                                                    
                            
खाकर धोखे बार बार मिला जो दर्द हमें कह ना पाया किसी से देख कर महरूमी पिछली बातें हमें भुलाना पड़ा है
हो गया गुमां तुम्हें जबसे बढ़ा के फासला मुझसे सामने कभी तू आता नहीं जान के बेरुखी तेरी सच सोचना पड़ा है
गर तुम खुश हो अपनी जिंदगी से तो रहो खुश हमेशा बढ़ा कर तन्हाई अपनी जी लगता नहीं ये सच कहना पड़ा है
सच तो ये होकर खफा तुमसे कुछ कर ना पाऊंगा होकर मायूस अपनी ही वफाओं से चिराग़ ए दिल बुझाना पड़ा है
3 महीने पहले
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