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अफसाना ए दिल ए बेकरार

Prem Narayan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रहा खफा मैं तेरी रुस्सवाइयों से ये सच तुमने कभी जाना कहां सुना कर बात दिल की यादें मैं ताज़ा करना चाहता हूं
        
                                                    
                            
तुम भी जान कर गैर हमें दीवार राह की समझने लगे जान कर मिजाज़ आपका हुआ जो दर्द तुमसे कहना चाहता हूं
जान कर फैसला तेरा घबराया बहुत और लाकर खामोशी लबों पे हुआ हमें जो नुकसान सच तुमसे कहना चाहता हूं
होकर मजबूर तुमसे फासला बढ़ाना होगा राह ए वफा मिलो या ना मिलो रख के हाथ दुखती रगों पे कहना चाहता हूं
मजबूर मैं इस कदर जो बदलते हालात में संभल ना पाया कभी बढ़ा कर फासला तुमसे आज ये सच कहना चाहता हूं
3 महीने पहले
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