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मां की महिमा

Pradeep Mukherjee

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सचमुच इस संसार में
        
                                                    
                            
नहीं ले सकता
मां की जगह कोई भी
बच्चों की शरारतों
और मनमानियों को
झेलती है जिस तरह से मां
जितने संयम, धैर्य
और इन सबसे ऊपर
बलिदान से
अपने बच्चों से
पेश आती है मां
उसके अलावा
यह वश में नहीं
और किसी के
मां के जाने के बाद
आती है मां की याद
बच्चों को
कई मन ही मन
बिलखते हुए
करते हैं याद मां को
निकलती है उनके अंतर से
यह आवाज़
कि क्यों नहीं हो आप
मेरे साथ मां
कर रहा हूं
अपने आंसू रोकने की
पूरी कोशिश मैं मां
क्योंकि जानता हूं कि अब तुम कभी
नहीं आ सकोगी मां।
2 महीने पहले
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