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पूंछ रहीं से मातृभाषा पोवारी।।

Powari Bhasha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जल बिन मछली
        
                                                    
                            
कसी बच पाये?
कर्णधारों ला,
पूंछ रहीं से मातृभाषा पोवारी।।

दिवो को बिना
बाती कसी जल पायें?
कर्णधारों ला,
पूंछ रहीं से मातृभाषा पोवारी।।

माटी को बिना
वटवृक्ष कसो जग पायें?
कर्णधारों ला,
पूंछ रहीं से मातृभाषा पोवारी।।

हवा को बिना
फुलों की खुशबू कसी फैल पायें।
कर्णधारों ला,
पूंछ रहीं से मातृभाषा पोवारी।।

पानी को पाट को बिना
तलाव को पानी खेत मा जायें कसो ?
कर्णधारों ला,
पूंछ रहीं से मातृभाषा पोवारी।।

संवाहिका को बिना
कसी संवाहित होय पायें संस्कृति?
कर्णधारों ला,
पूंछ रहीं से मातृभाषा पोवारी।।

मातृभाषा को बिना नवीं पीढ़ी
जड़ों सीन कसी जुड़ पाये?
कर्णधारों ला,
पूंछ रहीं से मातृभाषा पोवारी।।

--ओ सी पटले
एक महीने पहले
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Ankit Kumar

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