विज्ञापन

प्रभु से मिलन

Poonam milap bansal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ऐ काश… कि एक जहाँ होता
        
                                                    
                            
जिसमे तू होता और मैं होता
कुछ कहता तू कुछ मैं सुनता
कुछ मैं कहता फिर तू सुनता
तेरे प्यार को मेरा सर होता
मेरे समर्पण को तेरा पग होता…

अब तू सामने है पर मूरत है
तेरी छवि बड़ी खूबसूरत है
तेरे नयनों में कुछ जादू है
तुझे देख मन बेकाबू है…

पर काश कभी ये होता तू पत्थर की ना मूरत होता
मेरे सामने बस तू होता तेरे सामने भी बस मैं होता

अब चाहू की तुझे छू लू में अपने हृदय से लगा लू में या झुक जाऊ तेरे सजदे में तुझको बस नैनो में छुपा लू में
ये दिल कहे कभी मैं होता , मेरे पास में बस तू होता…
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

13403 कविताएं

View Profile