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ख़ुद से ख़ुद तक

pooja srivastava

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ख़ुद ही ख़ुद को ख़र्च किया था,
        
                                                    
                            
नहीं किसी ने हर्ज़ किया था,
मुझको भी अच्छा बनना था,
जाने कहाँ से मर्ज़ लिया था,

अपनी ख़ुशियाँ बाँट के देखीं,
हर आँसू पर फ़र्ज़ किया था,
दिल की बातें दिल में रख कर,
चेहरे पर बस दर्ज़ किया था,

टूटी साँसों को भी सी लूँ
हुनर एक ऐसा अर्ज़ किया था,
सबकी ख़ातिर जीना सीखा,
अपने हिस्से का क़र्ज़ किया था।।
-पूजा आर श्रीवास्तव
एक महीने पहले
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