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उनसा कोई भी नहीं

Parul Bhaktani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आपके साए से जब से हो गए महरूम हम
        
                                                    
                            
ज़िंदगी यूँ रूठी हमसे हो गए मग़्मूम हम

अब नहीं माँ-बाप जैसे साथ का कोई सुकूँ
अब तो खुशियों के लिए औरों पे हैं महकूम हम

बाद उनके जाना हमने उनसा कोई भी नहीं
ज़िंदगी में उनके बिन अब तो हुए मादूम हम

उनकी मेहनत से ही हासिल ज़िंदगी की हर खुशी
परवरिश दी हैसियत से बढ़के हैं मम्नून हम
2 महीने पहले
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