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प्रेम शब्दों से बड़ा था

Parul Bhaktani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सदा माता-पिता का प्रेम, शब्दों से बड़ा था
        
                                                    
                            
नहीं उनसे अधिक भी प्रेम, दुनिया में दिखा था

छुपा कर अपने अश्कों को, हँसाया हमको जिसने
हमारे वास्ते कोई नहीं,  उनके सिवा था

मोहब्बत इतनी, कोई दे नहीं सकता जहां में
दुआओं का ही उनकी, आसरा मुझको मिला था

फ़रिश्तों को कभी देखा नहीं था, उनसे पहले
उन्ही के क़दमों में, धरती की जन्नत का पता था

सुकूँ होता है कितना, उनके साए में हमेशा
शजर बन, अपना सर पर कोई साया सा रहा था

चुकाती मैं भी कैसे क़र्ज़ ये, माता-पिता का
सही राहों पे चलना, प्यार का उनके सिला था
3 महीने पहले
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