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निशाँ रह जाएँगे

Parul Bhaktani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ज़ख़्म भर जाएँगे इक दिन पर निशाँ रह जाएँगे
        
                                                    
                            
ज़िंदगी भर फ़ासले ही दरमियाँ रह जाएँगे

खोया हमने इक बहुत ही खूबसूरत रिश्ता है
हम भी बन के दिल की भूली दास्ताँ रह जाएँगे

ख़्वाब पूरे हो मुकद्दर में नहीं था अपने तो
उनके दिल में बन के अब हम राएँगा रह जाएँगे

किसको था मालूम खुशियाँ लुट ही जाएँगी मेरी
आरज़ू के दिल में भटके कारवाँ रह जाएँगे

रिश्ते कुछ बे-नाम होकर भी न छूटेंगे कभी
मेरे रूह ओ कल्ब में आँसू निहाँ रह जाएँगे
2 महीने पहले
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