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नहीं कोई यहाँ अपना

Parul Bhaktani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सिवा तेरे मेरे प्रभू, नहीं कोई यहाँ अपना
        
                                                    
                            
तू है तो मुझको लगता है, ये सारा ही जहाँ अपना

दगा दी है सभी ने, अपना कह कर मुझको दुनिया में
सभी अपने मगर, दिल से कोई होता कहाँ अपना

खताएँ ही सभी ने देखीं, देखा दिल नहीं मेरा
मोहब्बत से भरा दिल, करते किस पर हम अयाँ अपना

हमें उम्मीद थी जिससे, उसी ने ही नहीं समझा
करें शिकवा भी किससे, बोझ दिल पर है गराँ अपना

वो 'पारुल' को समझ पाया नहीं, दिल से कभी शायद
मुहब्बत का दिया उसने, जहां सारा गवाँ अपना
6 दिन पहले
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