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अनूप ख़्वाब हो

Parul Bhaktani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम हक़ीक़त अब नहीं आधा अधूरा ख़्वाब हो
        
                                                    
                            
आँखों में मेरी जो रहता है सदा वो आब हो

ज़िंदगी भर साथ क़िस्मत में नहीं शायद लिखा
वरना सच तेरी क़सम है दोस्त तुम नायाब हो

अपनी निस्बत जन्मों की है आज का नाता नहीं
खिंचती जिसकी ओर आई मैं वो तुम गिर्दाब हो

तुम नहीं चाहे मेरे, मै तो तेरी ही हूँ सनम
दिल से जिसको माना अपना तुम ही वो अहबाब हो

दूर होने से मोहब्बत ख़त्म तो होती नहीं
ज़िंदगी भर के लिए तुम ही वफ़ा का बाब हो
एक महीने पहले
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