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सब आप पर निर्भर करता है

pankhuri singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            समय भावनाओं के अधीन है
        
                                                    
                            
सफलता उसे उड़ना सिखा देती है
बिन पंख आसमां में उड़ता है
गम में तो जैसे ठहर जाता है
कछुए की चाल से आगे बढ़ता है
विपरीत काल में तो बस बेकाबू हो
न ही किसी की सुनता न ही मानता है
मंजर जब कुछ बुरा होता है
सहमा सा वो डर जाता है
भ्रमित हो राहें भटकता है
अब इंसान की भावनाओं से कुछ यूं बंधा है
संग उनके हंसता और रो लेता है
कभी दौड़ता और ठहर लेता है
अब समय के साथ चलना है
या अपने मन मुताबिक चलाना है
सब आप पर निर्भर करता है
 -सरिता सिंह
2 महीने पहले
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