विज्ञापन

दिशाहीन बहती रहती है

pankhuri singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खुद का वजूद न होना
        
                                                    
                            
उस नैया के समान है
जो बिन पतवार लहरों के सहारे
दिशाहीन बहती रहती है ।
-सरिता सिंह
5 दिन पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7409 कविताएं

View Profile