विज्ञापन

शिक्षा पर लगा प्रश्नचिह्न

Nilchitralekha vyas

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कलम ने आज सिसककर पूछा,
        
                                                    
                            
क्यों ज्ञान का आकाश धुंधला है?
क्यों अक्षर की पावन चौखट पर,
संशय का पहरा गहरा है?
जब शिक्षा ही प्रश्नों में घिर जाए,
तो उत्तर किससे माँगेंगे?
जो दीप जलाने निकले थे,
क्या वे ही अँधियारा बाँटेंगे?
विद्यालय केवल भवन नहीं,
राष्ट्र की साँस, समाज की धड़कन हैं।
इनसे ही भविष्य के पथिक,
संस्कारों के प्रथम स्पंदन हैं।
निर्णय यदि जनहित में हों तो,
जन-मन को विश्वास भी मिले;
पर शिक्षा पर हर परिवर्तन,
संवादों का प्रकाश भी मिले।
ज्ञान न सत्ता का आभूषण,
न किसी मत का व्यापार बने;
हर बालक का सहज अधिकार,
जीवन का प्रथम आधार बने।
आओ ऐसा समय रचें हम,
जहाँ शिक्षा निर्भय मुस्काए;
विवेक, करुणा, सत्य और श्रम से,
भारत का भविष्य जगमगाए।
-नीलचित्रा व्यास
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

13466 कविताएं

View Profile

Dr fouzia

6957 कविताएं

View Profile

Dn Chaubey

7504 कविताएं

View Profile