विज्ञापन

ऐसा होना चाहिए इंसान।

NIHALIKA K

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            काले बादल, अंधेरी रात
        
                                                    
                            
न कोई आस - पास,
घर को अपने लौट रही
परछाई थी बस मेरे साथ।
मिले राह में कुछ अनजान
हो गई रूह मेरी बेजान,
डरी, सहमी, घबराई हुई
न पता क्या होगा अंजाम।
नजरें नीची, तेजी-सी चाल
डर था कहीं खो न जाए मान,
घबराहट के इस बीच मिली थोड़ी राहत
कहने को अनजान, पर बन गए ढाल।
न पता क्या था नाम
दिया मुझे पूरा मान-सम्मान,
कलयुग के इस दौर में
ऐसा होना चाहिए इंसान।
12 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Pandey

416 कविताएं

View Profile

Powari Bhasha

333 कविताएं

View Profile