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कुछ प्रसिद्धि पाकर, सवाल का जवाब दिया

Neetu Saini

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तन सुखी मन सुखी, हृदय मे दया नहीं
        
                                                    
                            
जीवन में सबकुछ पाया, और कुछ पाया नहीं
एक दिन एकांत में किसी ने पूछ लिया
की प्रेम को ठुकराकर, तूने क्या हासिल किया
बाते करते करते लम्बी बात हो गई,
मुलाकात में पाया कि जीवन ही दुःख है,
कविता लिखना भी एक सुख है
कविता लिखने पर मिलता जो तुक है,
उस सुख से भी क्या सौगात हो गई
कविता लिखी तो खुद से बात हो गई
लिखते लिखते पाया कि लिख दिया नया कुछ,
मन की धारा के विपरीत, कर दिया नया कुछ
कुछ प्रसिद्धि पाकर, सवाल का जवाब दिया,
देखो ! मैं भी कुछ बन गया।।
-विकास सैनी
1 सप्ताह पहले
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