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अथक मन

neetu Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            के थका नहीं मन मेरा
        
                                                    
                            
ए जीवन कितना भगा ले तू
हर बार मैं गिरकर उठा हूं
सोते सोते जगा ले तू

माना के मंजिल दूर है मेरी
पर पहुंच से भी तो दूर नहीं
राह कठिन है मंजिल की
अब रुकना भी तो मंजूर नहीं
-नीटू मावी
3 महीने पहले
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Updesh Kumar

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