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भारत रक्षक

neetu Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            के जहां कोई नहीं वहां गुर्जर होगा
        
                                                    
                            
नहीं तो वहां पर उजड़ होगा
ये विख्यात बात गलियारों में
विश्वास खात ना विचारों में

अभिमान करे स्वाभिमान का
है योद्धा हिंदुस्तान का
गुर्जर, भारत का बलिदानी है
पुरखो ने लुटाई जवानी है

ना होनी थी जो,कर दिखाया
फिर, खदेड़ा शत्रु मार भगाया
पन्ने, भरे पड़े इतिहासों से
गाथा युद्ध से बनी ना बातों से

ना गिन पाओगे इतिहासों को
क्यों व्यर्थ में करते तेर मेर
थोड़ा पढ़ कर देखो रासो को
ना थका कहीं ना रुका कहीं
ना रण से भगा, बलिदान सही

ना जमा रही ना ज़मीं रही
हो गया बाग़ी, ना झुका कहीं
गुर्जर एक तरफ, फिरंगी थे
दो चार नहीं सब जंगी थे

समझौता किया मंजूर नहीं
आजादी मिलेगी दूर नहीं
है शीश कटाये बाल नहीं
कोई गुर्जर जैसा लाल नहीं

चर्चा नहीं बात बल से होगी
संग्राम आज ही होगा, कल नहीं
फिर फूंक दिया बिगुल मेरठ में
शत्रु भागेगा या होगा मरघट में

कोतवाल कूद पड़े संघर्ष में
धनसिंह उत्साह अति हर्ष में
फिर रण नहीं कोई 1857 होगा
फिरंगी कहां छिपेगा,
ना कोई दामन होगा

क्रांति भी उड़ती पतंग चिंगारी थी
दादरी भी कमजोर नहीं
सब पर भारी थी
दमन बहुत हुआ है,
अब ना कुछ सहना बाकी है
ये आरंभ है संग्राम का,
अभी तो बस ये झांकी है

उमराव सिंह उठ खड़े हुए,
आज भाटी भरा है रोष में
छीन कर लेंगे हम आजादी,
गुर्जर भरा है जोश में
हम राजा बने है रक्षा को,
क्या चूड़ी पहन कर बैठेंगे
मर मिट जाएंगे मिट्टी पर
सौगंध अधूरी ना छोड़ेंगे

पीछे हटी ना वीरांगनाएं,
डटकर शत्रु संहार किये
तलवार थामकर हाथों में,
चौखट से दुश्मन बाहर किए

ध्वजा उठाकर आशा देवी
अंग्रेजों की छाती गाड़ दिया
जो सामने आया गुर्जरी के
उठाकर वही पे फाड़ दिया

जंग कोई भी हो, फिर डट कर कि है
ना देर हुई फिर झट पट की है
किसानों का कर छुड़वाना है
हुआ विजय सिंह पथिक दीवाना है

उठाकर कलम, कलाम लिख दिया
महात्मा गांधी को सलाम लिख दिया
परिणाम की चिंता ना करता गुर्जर
लाग बाग नियम इंकलाब लिख दिया

वो मेवाड़ की महान वीरांगनाएं
लिख कर इतिहास चली पन्नाधाय
देकर पुत्र बलिदान गुर्जरी
सम्राटों के प्राण छुड़ाय

घाट से लेकर उस घाट तक
रण लड़े ह विराट तक
कोई गुर्जर जैसा सिंह नहीं
मिहिर भोज सम्राट तक

इतिहास लिखे तलवार से
शत्रु भगा ललकार से
कोई टूट गया कोई बिखर गया
राम बचाये प्रतिहार से

भारत की आन और शान है
गुर्जर वीर महान है
कवि कलम फिर फैंक गए
ये सारा मिहिर जहान है

इतिहास पढ़ो अभिलेख पर
जरा ध्यान करो शिलालेख पर
ना रेत पर फेरी उंगलियाँ
लिखे कवि आलेख पर
-नीटू मावी
3 महीने पहले
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