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मेरे जैसा शायद कोई फ़कीर नहीं

neetu Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            के पास मेरे महबूब की तस्वीर नहीं
        
                                                    
                            
शायद मेरे हाथों में वो लक़ीर नहीं

हो ना पाया प्यार मुकम्मल मेरा
जाने क्यूं मेरी ऐसी तक़दीर नहीं

में कैसे छुपाता तिज़ोरी में चाहत
मोहब्बत तो खुदा है जागीर नहीं

लूट गया इश्क़ में दिल और दिमाग़
मेरे जैसा शायद कोई फ़कीर नहीं

बस तू ही दवा थी मेरी तू ही दुआ
मैं रांझा हूं तेरा,पर अब तू हीर नहीं|
-नीटू मावी
एक महीने पहले
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