विज्ञापन

करुण रस

neetu Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            के एक मुसाफिर शोर सुने
        
                                                    
                            
शांत शांत सा मोर कुहे
कोई मानस मंद सा हिंके है
कोई जोर जोर से चींखें है

अगल बगल ना दूर दूर
है चारों दिशाएं नूर नूर
ये कैसा विघ्न दिशाओं में
कोई रोता लगे चिताओं में

एक डर भयानक सा लगता
एक दर्द अचानक सा लगता
खड़ा मुसाफिर चिता निहारे
बता मुसाफिर कहा चला रे

क्यों तू इतनी दूर खड़ा
एक बात है गहरी सुन जरा
मेरे मन की बातें रुकी रुकी
मैं मरता मरता दुखी दुखी

कैसे कहूँ के चिता ना रोए
आ बैठ धरा पर पास मेरे
घर में सयानी बेटी रोए
मां का दुख ना थोड़ा है
भार्या भाग्य सा फोड़ा है

मासूमियत चीखती चिता रुलाए
बेईमान जुलुम ने कहर बरसाए
गहरा समुद्र हृदय पिता का
तोड़ बांध सब दिशा बहाए
मन हृदय का मेल ना खाता
जब पिता पुत्र की चिता जलाए

-नीटू मावी
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3563 कविताएं

View Profile