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दिन-रात चलते चलते जरा आंखें सूज गई है

neetu Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बताने को क्या है मैं सब कुछ खो कर आया हूं
        
                                                    
                            
और ना पूछो के मैं कितना रो कर आया हूं

यह उम्र भर की लकीरें मेरे चेहरे पर छपी हैं
मैं अपनी औकात से ज्यादा बोझ ढोकर आया हूं

धक्के खाकर मावी सब्र का घूंट पिया है मैंने
मैं यहां तक खाते-खाते बस ठोकर आया हूं

दिन-रात चलते चलते जरा आंखें सूज गई है
और आप समझते हो कि मैं सो कर आया हूं
-नीटू मावी
3 सप्ताह पहले
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