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पहले से तय एजेंडा

Neet Biology

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                            पानी की चाल देखकर खोल दिए सारे बराज।
        
                                                    
                            
बस्तिया कलही बह गई ,मुनादी हो रही आज।
तनख्वाह में ही कैद है,ऐंकरो के झूठ का सच,
पहले तय एजेंडा,फिर अंतरात्मा की आवाज।
मुजरिम और मुंसिफ दोनो किताब की जिल्दे,
भीतरी पन्नों पर होता है संविधान का आगाज़।
गन्दी गन्दी गालीया सुनकर शब्दकोश निशब्द,
बदले बदले नजर आने लगे है,हया और लाज।
वोट की तलाश में नेताओं ने दो खजाने ढूंढे है,
पहला मंदिर का घंटा, दूसरा मस्जिद में नमाज़।
भाई चारा तो तुरंत हो जाए, बस शर्त है ईतनी,
वो तख़्त गिराएंगे सारे और उछालेंगे सब ताज।
1 सप्ताह पहले
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