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फलसफा जीवन का

Neelam Dayal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सारी उम्र जलता रहा अंतत मर कर भी जल गया
        
                                                    
                            
राख हुआ जल कर शरीर तेरा
गुरुर तेरा सारा खाक हो गया
क्यों जलता रहा सारी उमर
दो घड़ी बैठकर सोचता अगर
छोड़ गया दुनिया क्या मिला पाया भगवान से नजर
तिल तिल के मर गया
दो से बनाऊं चार इसी धुन में उलझा रहा
जीता अगर तू जिंदगी आता तुझे मजा
अपने दिमाग से कभी सोचा नहीं मिली इसकी सजा
जियो अपने लिए दिमाग अपना तुम लगाओ
जल जाओगे मर जाओगे चले जाओगे यह दुनिया छोड़कर सदा
हो जाओगे विदा
एक दिन पहले
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