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जीवनचक्र

Nathuram Kaswan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जीवनचक्र सतत घूमता रहता है अपने वर्तुल पथपर
        
                                                    
                            
मायूस कभी हो कर सवार कभी खुशियों के रथ पर
अच्छे को जीलो बुरे को सह लो हाथ दिलपर रखकर
क्या पकड़ सकेंगे आशा ओ निराशा को हम कसकर
-एन आर कस्वाँ
2 महीने पहले
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