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हालात-ए-हयात

Nathuram Kaswan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सब से बेहतर कहने वाले भी तुम को ख़राब और बुरा बताएंगे,
        
                                                    
                            
जब उनको येह लगेगा कि अब आप उनके काम नहीं आएंगे!
यकसाँ रहते नहीं हैं दिन कभी कहीं किसीकी हयात में मुर्शिद,
हालात-ए-हयात बदलते रहे हैं बदल रहे हैं बदलते ही जाएंगे!
-एन. आर. कस्वाँ
6 दिन पहले
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