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वास्तविकता

NAND KISHOR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सामना हुआ जिंदगी से लड़खड़ाने लगे
        
                                                    
                            
क्या कब कैसे क्यों में तड़पने लगे
अच्छा बुरा कभी सोचा ही नहीं
टूटते हुए अपनों को संभाला ही नहीं
कैसी दशा आंगन की हुई
झांक कर आएने में देखा ही नहीं
मां की ममता और पिता की सोच
बेटी के सपने और बेटे की ओर
पराए हुए अपने कारण ना पूछा
टूटी हुई छत की बूंदों का ख्याल
गूंजती किलकारी का अनोखा दुलार
रहा अनजान माया की दुनिया में
भरता रहा तिजौरी भोग के इंतजार में
सोना चांदी हीरे जवाहरात
हुआ पागल इनकी चकाचौंध में
सबकुछ कमाया फिर भी गंवाया
मुश्किल समय हाथ ना आया
3 महीने पहले
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