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NAND KISHOR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इम्तिहान चाहिए
        
                                                    
                            
ले लीजिए
ज़बाब प्रश्नों के
ले लीजिए
मिले सुकून जिसमें
परीक्षा भी वही
चाहो जैसे
करा लीजिए
शंका
जो मन में उठी
तमन्ना
जो दिल में जगी
वहम अधूरे
मिटा लीजिए
कष्ट मत दो
शरीर ढह जाएगा
रखा संभाल कर
बाढ़ में इक दिन
बह जाएगा
जलते हो
किस बात पर
डरते हो
किस बात पर
कुछ ज्यादा
चला गया
ले लीजिए
महल गाड़ी
हीरा जवाहरत
सब लीजिए
आंगन घर का
बांट लीजिए
फिर भी
मन भरा नहीं
हवाले
छोड़ चला जाता हूं
पर ईमान कहां
ममता कहां
रिश्तों की
परवाह कहां
सब खो जाएगा
रोना
इक दिन आएगा
महसूस
जब अकेला करोगे
पास
नहीं किसी को पाओगे
आंसू सूख चुके
अपने बिछड़ चुके
ना पास ना दूर कहीं
वीरान वस्ती में
अकेले तुम्हीं
सहारा
कोई नहीं
किनारा
कहीं नहीं
दर्द से कराहते
कोने में
पड़े कहीं
आत्मा
छोड़ती नहीं
प्राण
निकलते नहीं
तमन्ना
जीने की
अब और नहीं
3 महीने पहले
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