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स्वतंत्रता अक्षुण्ण हो

Naik prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कितने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान से
        
                                                    
                            
कई वर्षों के गुलामी के बाद इन जंजीरों को तोड़ा
असंख्य बलिदानों और संघर्ष के बाद मिली है आजादी
हमारा सिर्फ ध्यान रखना है कि कोई नहीं आये रोड़ा
हमारी कोशिश सिर्फ कोशीश करनी है
हमारी स्वतंत्रता अक्षुण्ण हो
कोई दुश्मन न तोड़ सके हमारी रक्षा कवच को
कोई दुश्मन न घुस पाये इस वतन की सरजमीं पर
हमारी भारत माता पहले कई बार हमारी लहू रंग चुकी है
अब हमें भारत- भूमि को दुश्मनों के लहू से रंगना है
हमारे देश की भूमि बच्चों के खेल का अंगना है
हमारी एकता, संगठतता, देश के प्रति संकल्प अक्षुण्ण हो
हमारी स्वतंत्रता अक्षुण्ण हो, हमारी स्वतंत्रता अक्षुण्ण हो
2 महीने पहले
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