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शिव-शंकर

Naik prasad

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                            शिव-शंकर बहुत भोले हैं
        
                                                    
                            
बहुत जल्द प्रसन्न भोले होते हैं
इसलिए नाम पड़ा भोले नाथ
भूत- पिशाच के आराध्य देव भोले नाथ
समुन्द्र मथन जब मिला जहर तो
कोई पक्ष ग्रहण नहीं किया तो
तब देव- असुर दोनों शिव- दरबार में
भोले नाथ ने गरल को धारण किया कण्ठ में
कोई भी कठीन तप कर पा जाता है वर शिव से
बस एक बार जब सती पार्वती
शिव के अपमान उनके पिता व्दारा किए जाने पर
हवन कुण्ड कूद कर प्राण त्याग दी
शिव-शंकर ने किए ताण्डव और तीसरा नेत्र खोल दिया
तीनों लोक धर- थर कांपने लगा
समुन्द्र की लहरे आकाश छूने लगी
पर्वत लुढ़कने घरौंदे जैसे
देव,राक्षस,मनुष्य डर से कांपने लगे
तीनों समूह के प्रतिनिधिमंडल पहुंचे
शिव-शंकर के पास और शांत होने की आराधना करने लगे
अन्ततः शांत हुए शिव- शंकर
ऐसे हैः हमारे शिव-शंकर
हर हर महादेव, नीलकंठ, देवों के देव महादेव
जय शिव-शंकर
2 महीने पहले
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