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सावन का महीना

Naik prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आसमान की रुदन थमती नहीं
        
                                                    
                            
सावन की लड़ी टूटती नहीं
कमाने लिए पिया गये परदेश
कोई काम नहीं आये गुरु के उपदेश
झम-झम बरसता सावन का पानी
कैसे सहूँ इस तड़फती विरह को
सावन कहे कुछ विहरनी को
कुछ सब्र करो रानी
थोड़ा-सा थमने दो पानी
सब्र करो धोड़ी सी रानी
आ गये तुम्हारे जानी
अब अबाध बरसने दो पानी
यह पानी है सावनी
यह है सावन का महिना
इसमें में निकले पसीना
2 महीने पहले
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