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मेरे हाथ में कुछ नहीं

NAGMANI KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            किसका बेटा, किसकी बेटी
        
                                                    
                            
किस घर का चिराग बनूं,
गोरा हूँ या काला हूँ
मेरे हाथ में कुछ नहीं।

आज हूँ, कल नहीं
कब कहाँ, पता नहीं
सोचता तो पल पल हूँ
मेरे हाथ में कुछ नहीं।

किसी का विचार क्या है?
किसी का सोच क्या है?
कौन गलत, कौन सही
मेरे हाथ में कुछ नहीं।

दर्पण नहीं, भगवान नहीं
कब हिंसा, कब नफरत
कब प्रेम, कब तलाक
मेरे हाथ में कुछ नहीं।

शाम कुछ, सुबह कुछ
आज पक्ष, कल विपक्ष
कोई मिला क्षत विक्षत
मेरे हाथ में कुछ नहीं।

रात गयी, बात गयी
सावधानी हटी, दुर्घटना घटी
सड़कों पर लाश बिछी
मेरे हाथ में कुछ नहीं।
एक महीने पहले
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