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यादों का समन्दर

Nag Mani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यार के डेरे पर धवल चाॅंदनी की जगमगाहट
        
                                                    
                            
चलो निहारूॅं चाॅंद को बाम पर से।

सुनसान रास्ते में पत्ते सिहरने से भ्रम होता है
आस-पास पाजेब खनकने का धोखा होता है।

अनजान-अजनबी बटोही भी अपना लगता है
राह में हर साया तुम्हारा लगता है।

सपनों में भी दिखती वही सूरत
निकला हो बाम पर मानो चाॅंद अभी-अभी.

यादों के समन्दर ने जकड़ लिया हमको
तोड़ने दे हर किनारा एक बार अब तो।
-नाग मणि
एक महीने पहले
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